बेचा है सोना, प्रॉपर्टी या शेयर्स तो रखें ध्यान, वर्ना आ सकता है Income tax का नोटिस

वित्तीय वर्ष के आखिर में हम अपनी सालाना आय की गणना कर लेते हैं और उस हिसाब से बचत के उपाय भी करते हैं। लेकिन अक्सर संपत्ति, शेयर, बांड या सोने का दूसरों को देते समय इस पर टैक्स की गणना करना भूल जाते हैं, या वित्तीय सलाहकार को इसकी जानकारी नहीं देते हैं। अगर रिटर्न दाखिल में हम इसकी जानकारी नहीं देते हैं तो हमें नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।

अगर बेचा है सोना
अगर आप सोना या अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषणों की बात करें तो अगर इसे खरीद के तीन साल के अंदर बेचते हैं तो एसटीएसजी लगता है। इसकी बिक्री से आपको जो कमाई हुई है, वह जिस आयकर स्लैब के दायरे में आता है, उतना ही टैक्स लगेगा। वहीं तीन साल के बाद बेचने पर इंडेक्सेशन के साथ 20.6 फीसदी टैक्स लगता है।

बेचा है इक्विटी म्यूचुअल फंड
अगर इक्विटी म्यूचुअल फंड की बात करें तो एक साल के भीतर बिक्री पर 15.45 प्रतिशत कर लगता है, वहीं एक साल बाद बिक्री करमुक्त होती है। वहीं डेट ओरियेंटेड म्यूचुअल फंड की तीन साल के भीतर बिक्री करते हैं तो टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। वहीं तीन साल बाद बेचने पर एलटीसीजी पर 20.6 फीसदी टैक्स लगता है।

अगर बेची है प्रॉपर्टी
संपत्ति के आकार और समय अवधि पर कर देनदारी निर्भर करती है। अगर कोई अचल परिसंपत्ति दो साल के भीतर बेचना चाहते हैं तो बिक्री और संपत्ति के खरीद अंतर के बाद जो रकम बचती है, वह कैपिटल गेन होता है।

अगर बेचें हैं शेयर्स

अगर आप शेयर किसी दूसरे को बेचते हैं तो उस पर टैक्स लगता है। शेयर खरीद की एक साल के अंदर बेचा जाता है तो इसे एसटीएसजी के दायरे में माना जाता है और एक साल से अधिक समय बाद इसे बेचने पर एलटीसीजी लगता है। अगर शेयर पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स चुका दिया गया है तो 15% एसटीसीजी (सेस अलग से) लगता है। एक साल के बाद 10% एलटीसीजी लगता है।
क्या होता है कैपिटल गेन
रीयल एस्टेट, सोना, बांड, शेयर, संपत्ति यानी कैपिटल एसेट के उदाहरण हैं। ये कैपिटल एसेट अगर हम किसी को ट्रांसफर करते हैं और उसमें कुछ वित्तीय लाभ मिलता है तो इसे कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ ) कहलाते हैं और यह आयकर के दायरे में आता है।