यहां पॉलीथिन से बनती है बिजली, देश में अनूठा है यह बिजली संयंत्र
कठौंदा में स्थापित पौने दो सौ करोड़ रुपए की लागत वाले वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में बन रही बिजली में प्लास्टिक वेस्ट का इस्तेमाल भी हो रहा है। इस प्लांट में रोजाना तीन से पांच टन प्लास्टिक वेस्ट खप रहा है, जिससे बिजली तो बन ही रही है, प्लास्टिक वेस्ट के प्रबंधन के लिए अलग से इंतजाम करने की दरकार भी नहीं रह गई।
अमानक पॉलीथिन व प्लास्टिक वेस्ट के घातक परिणामों के चलते प्रदेश में पॉलीथिन के इस्तेमाल, निर्माण व विक्रय पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पिछले साल अप्रैल में दक्षिण एशिया के अपनी तरह के इकलौते मास वर्किंग टेक्नोलॉजी वाले कठौंदा प्लांट के शुरू होने के बाद से रोजाना बड़ी मात्रा में जहां अपने आप ही प्लास्टिक वेस्ट का प्रबंधन हो रहा था, वहीं इससे बिजली भी बन रही थी।
पॉलीथिन पर प्रतिबंध से इसकी खपत व वेस्ट निकलने में बड़ी गिरावट आएगी। अब पानी की बॉटल, खिलौने आदि का वेस्ट ही निकलेगा, जिसकी मात्रा काफी कम रहेगी। प्रतिबंध के साथ ही जिला प्रशासन, नगर निगम व प्रदूषण बोर्ड ने पॉलीथिन का निर्माण व विक्रय करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम प्रशासन ने जब्त पॉलीथिन को कठौंदा प्लांट में बिजली बनाने में इस्तेमाल करने की प्लानिंग की है। आस-पास के दूसरे शहरों से भी यहां प्लास्टिक वेस्ट व जब्त पॉलीथिन बुलाया जा सकता है, जहां इसके प्रबंधन के कोई इंतजाम नहीं हैं।
शहर में चंचलाबाई कॉलेज रोड सहित तीन अन्य सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक वेस्ट का इस्तेमाल किया जा चुका है। हालांकि, केवल पांच प्रतिशत प्लास्टिक वेस्ट ही सड़क बनाने में इस्तेमाल किया गया था। नगर निगम के चीफ इंजीनियर एसएस गौड़ का कहना है कि प्लास्टिक वेस्ट का इस्तेमाल अन्य सड़कों के निर्माण में भी किया जाएगा। इसकी
पॉलीथिन विक्रेताओं व निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। निगम व प्रदूषण बोर्ड की संयुक्त टीम कार्रवाई कर रही है। कठौंदा स्थित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में बिजली बनाने में प्लास्टिक वेस्ट का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। शहर में जब्त होने वाली पॉलीथिन भी कठौंदा प्लांट भेजी जाएगी।