पेपर निरस्त होने से बढ़ा दुष्कर्म पीड़िता का दर्द, एकांत में जाने की थी योजना

उसके पिता ने ही उसकी इज्जत के साथ खिलवाड़ किया है, लेकिन उसका घर से निकलना मुश्किल हो गया है। आसपास के लोग उसको अजीब तरह से देखते है, जिसकी वजह से वह कहीं एकांत में जाने की योजना बना रही थी कि पेपर निरस्त होने की वजह से अब कुछ दिन और उसको घर में गुजारना पड़ेगा।

यह पीड़ा उस छात्रा की है जो अपने पिता की ज्यादती का शिकार होती रही। पेट में पल रहा छह माह का गर्भ बार-बार उसे अपने लिए सजा जैसा महसूस होता है। शुक्रवार को उसका आठवीं कक्षा का अंतिम पेपर था, लेकिन किसी कारण से निरस्त कर दिया गया।

वह दो-तीन दिन से जैसे-तैसे पढ़ाई कर परीक्षा देने के लिए तैयार हो गई थी। उसे हिम्मत देने चाइल्ड लाइन की टीम घर पहुंची। पीड़िता ने कहा अब उसका पढ़ने में ज्यादा मन नहीं लग रहा है। परीक्षा खत्म होने का इंतजार कर रही थी, लेकिन अब परेशानी और बढ़ गई। परीक्षा के बाद किसी एकांत वाली जगह पर रहना है ताकिलोगों की नजरों से बच सकूं। बहुत खराब महसूस होता है जब आसपास के लोग और रिश्तेदार बेवजह आकर बातचीत करते हैं।

पढ़ाई नहीं छोडूंगी, पैरों पर खड़े होना है-

पीड़िता ने बताया जो होना था, वह हो गया। कुछ दिन में सब ठीक हो जाएगा तो फिर से पढ़ाई शुरू करना है। पढ़ाई-लिखाई नहीं छोडूंगी, नहीं तो भविष्य में कुछ नहीं कर पाऊंगी। अब पापा भी जेल में रहेंगे तो घर चलाने के लिए सबको मेहनत करना पड़ेगी। उसे पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़े होना है।

बेटी के साथ साये की तरह रहती है मां-

पीड़िता की मां बेटी की हालत देखकर परेशान हो रही है। वह दिन-रात बेटी के साथ साये की तरह रहती है। बेटी को थोड़ी भी तकलीफ होने पर उसे दवाई के साथ-साथ समझाने की भी कोशिश करती है। चाइल्ड लाइन के निदेशक वसीम इकबाल ने बताया हमने पीड़िता की मां को आर्थिक मदद और राशन उपलब्ध कराने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। उनका कहना था जब तक उनसे बनेगा, वे अपने दम पर जुटा लेंगी। हालांकि उन्होंने डॉक्टर के लिए जरूर मदद मांगी है।