जानिए, क्यों ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की ‘भूमिका’ की जांच की मांग हुई तेज़

ब्रिटेन में एक अदालत ने अपने आदेश में उन चार सरकारी फाइलों को सार्जवनिक करने को कहा है जो 1980 के मध्य की पंजाब की स्थिति से जुड़ी है। ट्रिब्यूनल के इस आदेश के बाद 1984 में हुए पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की भूमिका की सार्वजनिक जांच की मांग बढ़ गई है।
किन फाइलों को सार्वजनिक करने की उठी मांग
दरअसल, इन चारों फाइलों को साल 2014 में ही जारी किया जाना था लेकिन इस आधार पर उस फैसले को कैबिनेट ऑफिस ने वापस ले लिया कि इससे भारत के साथ संबंधों पर विपरीत असर पड़ेगा। इसे जारी करने की मांग पत्रकार और शोधकर्ता फिल मिलर ने फ्रीडम ऑफ इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत की है।
क्यों ये मुद्दा है महत्वपूर्ण
यह मुद्दा इसलिए काफी अहमियत रखता है क्योंकि कुछ पेपर्स जनवरी 2014 में जारी किए गए थे। इनमें यह बताया गया था कि मार्गेट थैचर सरकार ने ने स्पेशल फोर्स ऑफिसर के जरिए तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार को जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू करने की सलाह दी थी।
क्यों प्रदर्शन पर अमादा है ब्रिटेन के सिख
इस खुलासे के बाद ब्रिटेन में रह रहे सिख समुदाय के लोगों ने इसमें वहां की सरकार की संलिप्तता को लेकर और जानकारी की मांग की। विपक्षी लेबर पार्टी ने इसे लेकर स्वतंत्र जांच का वादा किया है जबकि सत्ताधारी कंजर्वेटिव पार्टी ने कहा कि वे इस मुद्दे को दोबारा खोलने के खिलाफ हैं।
फाइल के खुलासे के बाद क्या हुआ
2014 में हुए खुलासे के बाद डेविड कैमरून सरकार उन फाइलों की कैबिनेट सेक्रेटरी जेरेमी हेईवुड से समीक्षा कराई जिसमें यह पता चला कि सलाह दी थी और किसी परिस्थिति में भारतीय सेना ने उसे नहीं माना था।
अब क्यों हो रहा है विवाद
दरअसल, जज मुर्रे शन्क्स ने इस दलील को खारिज कर दिया है कि फाइल में जो बातें है उसे जारी करने पर भारत के साथ संबंधों पर असर पड़ेगा। काफी संवेदनशील चीजें होने के चलते सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने उससे जुड़े कुछ साक्ष्यों को बंद कमरे में पेश किया।
अब कैबिनेट ऑफिस के पास 11 जुलाई तक का समय है कि वह ट्रिब्यूनल के इस फैसले के खिलाफ अपील करें या फिर 1983 से 1985 के बीच भारत-ब्रिटेन के बीच सबंधों को लेकर फाइल जारी करे। जिनमें मार्ग्रेट थैचर और इंदिरा गांधी के सलाहकार एल के झा के बीच बैठकें, पंजाब की स्थिति, सिख कट्टपंथियों की गतिविधियां और अक्टूर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या की बातें शामिल है